Friday, January 20, 2023

Motivational story | leave your comfort zone | #motivational #story #str...


2 सप्ताह के राजधानी प्रवास के दौरान कुछ पुराने मित्रों और शुभचिंतकों से मुलाकात हुई....उन्ही में से एक हैं डॉ.पांडे बॉस, उनके बारे में ज्यादा नहीं बताऊंगा...बस इतना समझ लीजिए वो शक्ल से डॉक्टर कम दार्शनिक और इंजीनियर ज्यादा लगते हैं...अधपकी दाढ़ी,चश्मा ,और शर्दियों में भी सैंडल ही पहनते हैं...किण्वित जौं रस के बहुत शौकीन हैं...

 

    उनसे पहली मुलाकात 5-7 साल पहले दिल्ली में ही हुई थी,तब मैं सरकारी नौकरी में था.. जौं रस के साथ उन्होंने बहुत सी ज्ञान की बातें बताई लेकिन तब मैं गरम खून का नौजवान था उनकी बातों को हल्के में लिया था...लेकिन उनकी बातें बहुत प्रैक्टिकल थी...

 

     इस बार मिलते ही उनका पहला सवाल था और क्या कर रहे हो इस समय?नौकरी कैसी चल रही है?? मैंने कहा बॉस बहुत पहले छोड़ दी;हमसे नही हो पाई...

   प्रैक्टिस कर रहा हु अपनी..एक छोटा मोटा हॉस्पिटल भी बनवा लिया है.....बॉस ने किण्वित जौं रस की एक चुस्की ली और मुस्कुराते हुए बोले "भैंस मारना" तुम्हारे लिए जरूरी था  ??

 

  मेरी समझ में नही आया की इसका क्या मतलब है;ये किसी तरह की स्याबाशी है या व्यंग ? कुछ सेकंड  तक मैं दिमाग लगाता रहा फिर चेहरे पर मिले जुले भाव देते हुए बोला बॉस ये भैंस वाला नही समझा मैं!

 

बॉस बोले ये बात मैंने तुमसे तब भी कही थी जब पहली बार मिले थे तुम काफी कन्फ्यूजन में थे की प्रैक्टिस करें या नौकरी तब भी मैने  यही कहा था, शायद तुमने ध्यान नहीं दिया था...मैं कुछ याद करने की कोशिश करते हुए  सिर हिलाया बॉस याद नही आ रहा... लेकिन अब तो बता दो ये भैंस वाला क्या चक्कर है??

 

 बॉस बोले एक फेमस कहानी है...फिर बॉस ने  जो कहानी सुनाई वो वास्तव में बहुत ही प्रेरणादायक है..जिसका सार ये है कि कई बार हम अपने प्रोफेशनल लाइफ में एक कंफर्ट जोन में फंस जाते हैं,उससे बाहर आने की कोशिश नहीं करते...एक छोटा लक्ष्य प्राप्त करके संतुष्ट हो जाते हैं;अपनी क्षमताओं को नही पहचान पाते,हम जो कर सकते हैं,जिस मुकाम पर पहुंच सकते हैं वो नही हासिल कर पाते...

 

कहानी कुछ इस प्रकार है -

           एक महात्मा अपने एक शिष्य के साथ जा रहे थे,चलते हुए एक बड़े से खेत के पास से गुजरे;बड़ा सा खेत,लोकेशन भी बढ़िया लेकिन खेत की हालत देखकर लगता था मानो खेत  वाला उस पर जरा भी ध्यान नहीं देता है,उन्हें प्यास लगी थी वे खेत के बीचो-बीच बने एक टूटे-फूटे घर के सामने पहुंचे और दरवाज़ा खटखटाया;अन्दर से एक आदमी निकला, उसके साथ उसकी पत्नी और बच्चे भी थे सबके सब फटे पुराने कपड़े पहने हुए दयनीय स्थिति में थे..

महात्मा बोले श्रीमान, क्या हमें पानी मिल सकता है? बहुत जोर की प्यास लगी है!”

 

ज़रूर!”, आदमी उन्हें पानी का जग थमाते हुए बोला।

 

मैं देख रहा हूँ कि आपका खेत इनता बड़ा है पर इसमें कोई फसल नही बोई गयी है,और ना ही यहाँ फलों के पेड़ हैंन फूलों आदि का बगीचा है तो आखिर आप लोगों का गुजारा कैसे चलता है?”, महात्मा ने प्रश्न किया।

 

जी, हमारे पास एक भैंस है, वो काफी दूध देती है उसे पास के गाँव में बेच कर कुछ पैसे मिल जाते हैं और बचे हुए दूध का सेवन कर के हमारा गुजारा चल जाता है।”, आदमी ने समझाया

 

महात्मा और शिष्य आगे बढ़ने को हुए तभी आदमी बोला, “ शाम काफी हो गयी है, आप लोग चाहें तो आज रात यहीं रुक जाएं!”

दोनों रुकने को तैयार हो गए।

 

आधी रात के करीब जब सभी गहरी नींद में सो रहे थे तभी महात्मा ने शिष्य को उठाया और बोला, “चलो हमें अभी यहाँ से चलना है, और चलने से पहले हम उस आदमी की भैंस को चट्टान से गिराकर मार डालेंगे।

 

शिष्य को अपने गुरु की बात पर यकीन नहीं हो रहा था पर वो उनकी बात काट भी नहीं सकता था।

दोनों भैंस को मार कर रातों-रात गायब हो गए!

 

यह घटना शिष्य के जेहन में बैठ गयी और करीब 10- 12 साल बाद जब वो एक सफल बिजनेस मैन बन गया तो उसने सोचा क्यों न अपनी गलती का पश्चाताप करने के लिए एक बार फिर उसी आदमी से मिला जाए और उसकी आर्थिक मदद की जाए।

 

अपनी चमचमाती कार से वह उस खेत के सामने पहुंचा।

शिष्य को अपनी आँखों पे यकीन नहीं हो रहा था। वह उजाड़ खेत अब फलों के बागीचे में बदल चुका थाटूटे-फूटे घर की जगह एक शानदार बंगला खड़ा था और जहाँ अकेली भैंस बंधी रहती थी वहां अच्छी नस्ल की कई गाएं और भैंस अपना चारा चर रही थीं।

शिष्य ने सोचा कि शायद भैंस के मरने के बाद वो परिवार सब बेच-बाच कर कहीं चला गया होगा और वापस लौटने के लिए वो अपनी कार स्टार्ट करने लगा कि तभी उसे वो दस साल पहले वाला आदमी दिखा।

शायद आप मुझे पहचान नहीं पाए, सालों पहले मैं आपसे मिला था।”, शिष्य उस आदमी की तरफ बढ़ते हुए बोला।

 

नहीं-नहीं, ऐसा नहीं है, मुझे अच्छी तरह याद है, आप और आपके गुरु यहाँ आये थेकैसे भूल सकता हूँ उस दिन को; उस दिन ने तो मेरा जीवन ही बदल कर रख दिया। आप लोग तो बिना बताये चले गए पर उसी दिन ना जाने कैसे हमारी भैंस भी चट्टान से गिरकर मर गयी। कुछ दिन तो समझ ही नहीं आया कि क्या करें, पर जीने के लिए कुछ तो करना था, सो लकड़ियाँ काट कर बेचने लगा, उससे कुछ पैसे हुए तो खेत में बोवाई कर दीसौभाग्य से फसल अच्छी निकल गयी, बेचने पर जो पैसे मिले उससे फलों के बागीचे लगवा दिए और यह काम अच्छा चल पड़ा और इस समय मैं आस-पास के हज़ार गाँव में सबसे बड़ा फल व्यापारी हूँसचमुच, ये सब कुछ ना होता अगर उस भैंस की मौत ना हुई होती !

 

लेकिन यही काम आप पहले भी कर सकते थे?”, शिष्य ने आश्चर्य से पूछा।

 

आदमी बोला, “ बिलकुल कर सकता था! पर तब ज़िन्दगी बिना उतनी मेहनत के आराम से चल रही थी, कभी लगा ही नहीं कि मेरे अन्दर इतना कुछ करने की क्षमता है सो कोशिश ही नहीं की पर जब भैंस मर गयी तब हाथ-पाँव मारने पड़े,बच्चो का पेट पालने के लिए मेहनत करनी पड़ी और मुझ जैसा गरीब-बेहाल इंसान भी इस मुकाम तक पहुँच पाया।

आज शिष्य अपने गुरु के उस निर्देश का असली मतलब समझ चुका था और बिना किसी पश्चाताप के वापस लौट पा रहा था।

 

      कई बार हम परिस्थितियों के इतने आदी हो जाते हैं कि उन्हें बदलने की कोशिश ही नहीं करते...

 

सोचिये, कहीं आपकी ज़िन्दगी में भी तो कोई ऐसी भैंस नहीं जो आपको एक बेहतर ज़िन्दगी जीने से रोक रही हैकहीं ऐसा तो नहीं कि आपको लग रहा है कि आपने उस भैंस को बाँध कर रखा है जबकि असलियत में उस भैंस ने आपको बाँध रखा है! और अगर आपको लगे कि ऐसा है, तो आगे बढिएहिम्मत करिए, अपनी रस्सी को काटिए; आजाद होइएआपके पास खोने के लिए बहुत थोड़ा है पर पाने के लिए पूरा जहान है!



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